दबंग लकड़ी ठेकेदार सोएब फरीदपुर खबर प्रकाशित होते ही कई पत्रकारों को दे डाली जान से मारने की धमकी..!
💥वन दरोगा अनूप सिंह का भिटौरा ब्लॉक हुसैनगंज ट्रांसफर होते ही हसवा ब्लाक के अंतर्गत जमकर हरे पेड़ों की कटान जोरों करवाई-सूत्र
💥भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा जनपद का वन विभाग, वन दरोगा अनूप सिंह का वेतन से नहीं भरता पेट, इसलिए लकड़ी ठेकेदारों से हरे वृक्ष कटवाने के खोल रखें थे रेट!
💥 उत्तर प्रदेश की सरकार पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ का नारा लगा रही है, वहीं चंद पैसों में वन विभाग एवं पुलिस विभाग हरे-भरे फलदार वृक्ष कटवा रही है!
फतेहपुर । जनपद में इन दिनों हरे पेड़ों की कटान सातवें आसमान पर है, जनपद के ही सदर तहसील क्षेत्र में वन क्षेत्राधिकार के बिना अनुमति से नीम, आम, महुआ, गूलर, की कटान जोरो पर नहीं होती कोई कार्यवाही जिम्मेदारों से पूछने पर बताते हैं कि पर्चा काटा जाएगा और लकड़ी ठेकेदारों की हौसले बुलंद रहते हैं।
💥सेमरी गांव में दिन-दहाड़े हरे महुआ के 06 पेड़ों की कटान का वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हुआ कार्यवाही अभी भी शून्य।
💥असोथर थाने के इसके पहले रसूलपुर वैसापुर में नहर किनारे 05 नीम के पेड़ धराशाही कर दिए गए, शिकायत पर टीम द्वारा दो पेड़ का जुर्माना कर तीन नीम पेड़ों का ठेकेदार को जीवन दान अभी भी कोई कार्रवाई नहीं!?
ज़ब मामले की पड़ताल की गई तो पेड़ों की कटान करने वाले ने बताया की हमने थरियांव थाना क्षेत्र ,असोथर थाना क्षेत्र , किशनपुर थाना क्षेत्र पेड़ों को काटने का ठेका ले लिया है, तो ऐसे में आखिर सवाल यह खड़ा हो रहा है की इन दिनों क्षेत्र में लकड़ी कटान जोरों पर है और इस दौरान नीम,आम, महुआ के पेड़ों की कटान चल रही है इसे क्या कहा या क्या समझा जाये.....!? कार्यवाही शून्य होती है।
बताते चलें कि थाना असोथर क्षेत्र में सेमरी गांव में 06 हरे महुआ के पेड़ धराशाही कर दिए गए और एक आम का सूखा पेड़ का परमिशन करा कर महुआ के पेड़ों का बंध कर दिया गया अभी कार्रवाई नहीं हुई दबंग ठेकेदार पत्रकारों को जान से मारने की धमकी दे डाली।
बड़ा सवाल----
जानकारों के मुताबिक या यूँ कहें कि उत्तर प्रदेश वन अधिनियम एक्ट के तहत विषम परिस्थितियों में ही प्रतिबंधित हरे पेड़ों की कटान की जा सकती है, लेकिन इतनी भारी मात्रा में पेड़ों को नहीं काटा जा सकता है।
जैसे- पेड़ स्वामी अपनी निजी बीमारी व बेटी की शादी या आमजनमानस को हानि एवं अन्य विषम परिस्थितियों में ही एक व दो पेड़ों को काटने की परमिशन दी जाती थी।?
अब देखने वाली बात यह होगी कि वन विभाग ठेकेदार के ऊपर क्या कार्रवाई करते हैं।या गांधी जी की चमक में पूरा मामला दबा दिया जाएगा।
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