पैन-आधार लिंकिंग को लेकर सख्ती जारी है। अगर आपने अब तक पैन कार्ड को आधार कार्ड से लिंक नहीं कराया है, तो जल्द से जल्द यह प्रक्रिया पूरी कर लें। पैन-आधार लिंकिंग अब अनिवार्य हो चुकी है। समय पर लिंक नहीं कराने पर जुर्माना लग सकता है और आपके कई जरूरी वित्तीय काम अटक सकते हैं।
पैन निष्क्रिय होने की स्थिति में बैंकिंग सेवाएं, आयकर रिटर्न फाइल करना, टैक्स रिफंड, निवेश और अन्य वित्तीय सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या पैन-आधार लिंक कराना सभी के लिए जरूरी है? और किन लोगों को इससे छूट मिली है?
किन लोगों को मिली है छूट?
आयकर विभाग के नियमों के अनुसार 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों (सुपर सीनियर सिटीजन) को पैन और आधार लिंक कराने से छूट दी गई है। इसके अलावा एनआरआई (अनिवासी भारतीय) और भारत के निवासी न होने वाले विदेशी नागरिकों पर भी यह नियम लागू नहीं होता।
वहीं, असम, मेघालय और जम्मू-कश्मीर जैसे कुछ विशेष राज्यों के निवासियों को भी पैन-आधार लिंकिंग के दायरे से बाहर रखा गया है। यानी इन राज्यों के लोग इस प्रक्रिया के लिए बाध्य नहीं हैं।
बच्चों और जॉइंट अकाउंट को लेकर स्थिति
अक्सर यह भ्रम रहता है कि बच्चों और जॉइंट अकाउंट धारकों को पैन-आधार लिंकिंग से छूट है, जबकि ऐसा नहीं है। यदि किसी बच्चे के नाम से पैन कार्ड बना है और वह कर दायरे में आता है, तो उसे भी पैन-आधार लिंक कराना जरूरी है।
यदि बैंक खाता जॉइंट अकाउंट है, तो प्रत्येक खाताधारक को अपने-अपने पैन और आधार को अलग-अलग लिंक कराना होगा। लिंक नहीं कराने पर पेंडिंग टैक्स रिफंड रुक सकता है और उस पर मिलने वाला ब्याज भी नहीं मिलेगा।
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