ललितपुर (उत्तर प्रदेश): जनपद ललितपुर के कोतवाली तालबेहट क्षेत्र से निवेश से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें निवेशक ने कथित रूप से राशि वापस न मिलने पर न्यायालय की शरण ली। मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने संबंधित व्यक्ति और अन्य अज्ञात लोगों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
वर्ष 2019 में कराया था निवेश
कोतवाली तालबेहट अंतर्गत मोहल्ला चैबयाना निवासी शक्ति पुत्र श्रीराम ने न्यायालय में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र में बताया कि वर्ष 2019 में पूराकलां थाना क्षेत्र के निवासी दीपक पुत्र प्रकाश अहिरवार अपने कुछ साथियों के साथ उनके घर आए थे। उन्होंने स्वयं को एलयूसीसी कंपनी का एजेंट बताते हुए कम समय में धनराशि दोगुनी करने का प्रस्ताव दिया।
आवेदक के अनुसार, समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए स्टाम्प पेपर पर लिखित आश्वासन भी दिया गया था। इसके बाद उन्होंने विभिन्न आईडी के माध्यम से अपने और परिवार के सदस्यों के नाम से लाखों रुपये की एफडी और आरडी योजनाओं में निवेश किया।
दावा है कि वर्ष 2024 से कई आईडी की परिपक्वता अवधि पूरी हो चुकी है, लेकिन अब तक किसी भी निवेश राशि का भुगतान नहीं किया गया है।
भुगतान के नाम पर टालमटोल का आरोप
आवेदक का कहना है कि जब भी उन्होंने संबंधित एजेंट से संपर्क किया, उन्हें आश्वासन दिया जाता रहा कि जल्द भुगतान हो जाएगा। बाद में समाचार पत्रों के माध्यम से कंपनी के संचालन में अनियमितता की जानकारी मिलने पर उन्होंने पुनः संपर्क किया।
4 सितंबर 2025 को सुबह लगभग 8 बजे वे एजेंट के घर भुगतान की मांग को लेकर पहुंचे। आरोप है कि वहां कथित रूप से रकम हड़प लेने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। घटना के दौरान कुछ स्थानीय लोगों के मौजूद होने का भी उल्लेख किया गया है।
पुलिस में शिकायत, फिर न्यायालय की शरण
आवेदक के अनुसार, 4 सितंबर को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दी गई थी, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई न होने पर उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
न्यायालय के आदेश पर कोतवाली तालबेहट पुलिस ने संबंधित व्यक्ति और आठ-दस अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
निवेश से जुड़े मामलों में सतर्कता आवश्यक
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी निवेश योजना में धन लगाने से पहले उसकी वैधता और पंजीकरण की जानकारी अवश्य जांच लेनी चाहिए। केवल मौखिक आश्वासन या अनौपचारिक दस्तावेजों के आधार पर निवेश करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
प्रशासन द्वारा भी समय-समय पर आम नागरिकों को अपंजीकृत योजनाओं और संदिग्ध निवेश प्रस्तावों से सावधान रहने की सलाह दी जाती रही है।
निष्कर्ष
ललितपुर के इस मामले में न्यायालय के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। अब आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। निवेशक ने अपनी धनराशि वापस दिलाने और विधिक कार्रवाई की मांग की है।
मामले की निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर निर्णय से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।..................................
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