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फतेहपुर : मार्का मोरंग खदान खंड संख्या 03 का खेल?

ओवरलोड वाहनों से कराह रहीं सड़कें, जिम्मेदार विभागों पर उठे सवाल
रिपोर्ट: श्रीराम अग्निहोत्री
स्थान: फतेहपुर/असोथर
फतेहपुर जनपद के असोथर नगर पंचायत एवं आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों ओवरलोड मोरंग लदे वाहनों का संचालन चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि बांदा जनपद स्थित मार्का मोरंग खदान खंड संख्या 03 से जुड़े परिवहन कार्य में क्षमता से अधिक लोडिंग कर वाहनों को विभिन्न जनपदों की ओर भेजा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस ओवरलोडिंग का सीधा असर क्षेत्र की सड़कों, यातायात व्यवस्था और आमजन की सुरक्षा पर पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पहलवान ट्रेडर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित बताए जा रहे इस खनन क्षेत्र से प्रतिदिन बड़ी संख्या में डंपर, ट्रक और ट्रैक्टर मोरंग लेकर निकलते हैं। इनमें से कई वाहन कथित रूप से तय मानकों से अधिक भार लेकर सड़कों पर दौड़ते दिखाई देते हैं। इन वाहनों का रूट असोथर, थरियांव, फतेहपुर, रायबरेली, कौशांबी होते हुए प्रतापगढ़ तक बताया जा रहा है।
सड़कों की हालत पर असर
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि भारी और ओवरलोड वाहनों की लगातार आवाजाही से क्षेत्र की मुख्य और संपर्क मार्गों की हालत खराब होती जा रही है। कई जगह सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। बरसात के मौसम में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है, जब सड़कें दलदल जैसी प्रतीत होने लगती हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नई बनी सड़कें भी कुछ ही महीनों में क्षतिग्रस्त हो रही हैं।
व्यापारियों का कहना है कि सड़क खराब होने से ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है, जिससे स्थानीय कारोबार पर भी असर पड़ रहा है। वहीं स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए आवागमन जोखिम भरा हो गया है।
यातायात और सुरक्षा पर खतरा
ओवरलोड वाहनों की तेज रफ्तार को लेकर भी क्षेत्र में चिंता जताई जा रही है। कस्बाई इलाकों से गुजरते समय भारी वाहन संकरी सड़कों पर तेज गति से निकलते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार अचानक ब्रेक लगाने या संतुलन बिगड़ने से हादसे होते-होते बचे हैं।
हाल ही में कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुए हैं, जिनमें कथित तौर पर ओवरलोड डंपर सड़कों पर फर्राटा भरते नजर आ रहे हैं। हालांकि इन वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इनसे क्षेत्र में चर्चा और चिंता दोनों बढ़ी हैं।
जिम्मेदार विभागों पर सवाल
इस पूरे मामले में परिवहन विभाग, खनन विभाग और राजस्व विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि वाहनों की नियमित जांच और वजन माप की व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू हो, तो ओवरलोडिंग पर अंकुश लगाया जा सकता है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि चेकपोस्ट और वजन मशीनें केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं। यदि नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, तो न केवल सड़कें सुरक्षित रहेंगी बल्कि राजस्व हानि भी रुकेगी।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों और नगरवासियों ने जिला प्रशासन से मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। उनका कहना है कि ओवरलोडिंग की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
कुछ लोगों का यह भी कहना है कि खनन कार्य पूरी तरह बंद करना समाधान नहीं है, क्योंकि इससे स्थानीय रोजगार प्रभावित होगा। लेकिन नियमों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। विकास और नियम दोनों साथ-साथ चलें, यही जनता की अपेक्षा है।
क्षेत्रीय प्रभाव और व्यापक चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि ओवरलोडिंग केवल सड़क क्षति का कारण नहीं बनती, बल्कि इससे वाहन दुर्घटनाओं की संभावना भी बढ़ती है। ब्रेक फेल, वाहन पलटना और टायर फटना जैसी घटनाएं अक्सर अधिक भार के कारण होती हैं। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण न किया गया, तो किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्षेत्र में चर्चा है कि प्रशासनिक स्तर पर यदि संयुक्त टीम बनाकर नियमित चेकिंग अभियान चलाया जाए, तो स्थिति में सुधार संभव है। साथ ही सीसीटीवी निगरानी और डिजिटल वजन माप प्रणाली को प्रभावी बनाया जाए।
निष्कर्ष
फिलहाल असोथर और आसपास के इलाकों में ओवरलोड मोरंग वाहनों की आवाजाही लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। सड़कें कराह रही हैं, यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है और जिम्मेदार विभागों पर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
जनता की मांग स्पष्ट है — खनन और परिवहन कार्य नियमों के तहत हो, सड़कों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और आम नागरिकों की जान-माल की रक्षा सर्वोपरि रखी जाए।

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