पुलिया टूटने से सैकड़ों लोगों की आवाजाही और रोजगार प्रभावित होने की आशंका
फतेहपुर। शहर के नउवाबाग क्षेत्र में नाला सफाई के दौरान प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है। क्षेत्र के कई ग्रामीणों और व्यापारियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर नाले पर बनी पुलिया को न तोड़ने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पुलिया उनके लिए आवागमन का एकमात्र साधन है और इसके हटने से सैकड़ों लोगों की दैनिक जिंदगी पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार नउवाबाग क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग के उत्तर दिशा में एक नाला बना हुआ है। इस नाले के दूसरी तरफ कई लोगों के मकान, छोटे-छोटे कारखाने, कार्यस्थल और खेती की जमीन स्थित हैं। वहां आने-जाने के लिए वर्षों पहले पाइप डालकर एक अस्थायी पुलिया बनाई गई थी। इसी पुलिया के सहारे आसपास के सैकड़ों लोग प्रतिदिन आवाजाही करते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि नाले की सफाई के लिए प्रशासन द्वारा अभियान चलाया जा रहा है, जो कि एक सकारात्मक और आवश्यक पहल है। लेकिन नाला सफाई के दौरान इस पुलिया को तोड़ने की योजना बनाई जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों की परेशानियां बढ़ सकती हैं। उनका कहना है कि पुलिया के कारण नाले के पानी की निकासी में किसी प्रकार की बाधा नहीं आती है और वर्षों से यह व्यवस्था बिना किसी समस्या के चल रही है।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने यह भी उल्लेख किया कि पुलिया टूट जाने की स्थिति में नाले के दूसरी ओर बसे परिवारों का संपर्क मुख्य सड़क से लगभग पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। ऐसे में लोग अपने घरों तक पहुंचने, बच्चों के स्कूल जाने, किसानों के खेतों तक पहुंचने और कारखानों में काम करने के लिए रास्ता नहीं पा सकेंगे। इससे क्षेत्र के कई परिवारों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि नाले के दूसरी ओर जाने के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं है। यदि पुलिया को हटाया जाता है, तो लोगों को कई किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाकर दूसरे रास्ते से जाना पड़ेगा, जो कि व्यावहारिक रूप से काफी कठिन है। विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह स्थिति और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि मौके पर राजस्व विभाग की टीम जेसीबी मशीन के साथ पहुंच चुकी थी और पुलिया को हटाने की तैयारी की जा रही थी। इस सूचना के बाद क्षेत्र के लोग चिंतित हो गए और उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की। इसी क्रम में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्या से अवगत कराया।
ज्ञापन में प्रशासन से अनुरोध किया गया है कि जब तक क्षेत्र के लोगों के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक पुलिया को न हटाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि नाला सफाई का कार्य जरूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ स्थानीय लोगों की सुविधा और सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी सुझाव दिया कि यदि प्रशासन चाहे तो पुलिया को मजबूत बनाकर स्थायी रूप दिया जा सकता है, जिससे नाले की सफाई भी प्रभावित न हो और लोगों की आवाजाही भी जारी रह सके। उनका मानना है कि संवाद और सहयोग के माध्यम से इस समस्या का व्यावहारिक समाधान निकाला जा सकता है।
इस पूरे मामले में स्थानीय लोगों ने प्रशासन से संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। उनका कहना है कि पुलिया केवल एक संरचना नहीं, बल्कि सैकड़ों लोगों की दैनिक जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले क्षेत्र के लोगों की स्थिति और जरूरतों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान कई स्थानीय लोग मौजूद रहे। इनमें मोहम्मद आसिफ एडवोकेट, मोहम्मद माशूक, परवेज अहमद, अहमद रजा, कल्लू, महेश, सुधीर, विनीत मौर्या और जितेन्द्र कुमार मौर्य सहित अन्य नागरिक शामिल थे। सभी ने एक स्वर में प्रशासन से पुलिया को सुरक्षित रखने और क्षेत्र के लोगों की समस्याओं का समाधान करने की मांग की।
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि जिलाधिकारी उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए उचित निर्णय लेंगे। उनका कहना है कि प्रशासन यदि समय रहते समाधान निकालता है, तो क्षेत्र के सैकड़ों परिवारों को बड़ी परेशानी से बचाया जा सकता है।
स्थानीय नागरिकों ने यह भी कहा कि वे प्रशासन के विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, बल्कि चाहते हैं कि विकास कार्यों के साथ-साथ आम जनता की जरूरतों का भी ध्यान रखा जाए। यदि प्रशासन और जनता मिलकर काम करें, तो किसी भी समस्या का संतुलित और स्थायी समाधान संभव है।
फिलहाल ग्रामीण प्रशासन के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी तथा उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने वाले इस मुद्दे का जल्द समाधान निकलेगा।
रिपोर्टर – श्री राम अग्निहोत्री
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