बाल सुरक्षा, पॉक्सो मामलों और गुमशुदा बच्चों की रोकथाम पर अधिकारियों ने की विस्तृत चर्चा
ललितपुर। जनपद में महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों को अधिक प्रभावी ढंग से निपटाने और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से गुरुवार को पुलिस लाइन स्थित सभागार कक्ष में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाना (एएचटी) और स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (एसजेपीयू) की मासिक समन्वय गोष्ठी एवं प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में बाल सुरक्षा से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा की गई और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।
यह बैठक पुलिस अधीक्षक के निर्देशन तथा अपर पुलिस अधीक्षक एवं नोडल अधिकारी कालू सिंह के पर्यवेक्षण में आयोजित की गई। गोष्ठी में एएचटी थाना, एसजेपीयू के अधिकारी-कर्मचारी तथा जनपद के सभी थानों में नियुक्त बाल कल्याण पुलिस अधिकारी शामिल हुए। बैठक के दौरान मार्च माह में किए गए कार्यों की समीक्षा के साथ-साथ भविष्य की कार्ययोजना पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों पर हुई समीक्षा
गोष्ठी में सबसे पहले जनपद में दर्ज बाल गुमशुदगी के मामलों की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि गुमशुदा बच्चों की तलाश में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए और हर मामले में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही लंबित मामलों को जल्द से जल्द निस्तारित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।
बैठक में बाल श्रम, बाल विवाह और बाल भिक्षावृत्ति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि इन सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए प्रशासन, पुलिस और समाज के विभिन्न वर्गों को मिलकर काम करना होगा। इसके लिए समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता भी बताई गई।
पॉक्सो एक्ट मामलों में सख्ती के निर्देश
गोष्ठी के दौरान पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों को लेकर विशेष रूप से चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज होने वाले सभी मामलों में कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया जाए।
बैठक में स्पष्ट रूप से बताया गया कि पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत दर्ज किसी भी मामले की सूचना 24 घंटे के भीतर बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को देना अनिवार्य है। इसके अलावा फार्म ए, बी और एसबीआर रिपोर्ट समय पर भेजने के भी निर्देश दिए गए।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि किसी पॉक्सो मामले में आरोपी को उच्च न्यायालय से जमानत मिलती है, तो इसकी जानकारी तुरंत वादी, पीड़िता और बाल कल्याण समिति को दी जानी चाहिए। इससे मामले की पारदर्शिता बनी रहती है और पीड़ित पक्ष को समय पर आवश्यक जानकारी मिलती है।
किशोर न्याय अधिनियम पर दिया गया प्रशिक्षण
गोष्ठी में किशोर न्याय अधिनियम 2015 (जेजे एक्ट) में हुए नवीन संशोधनों की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों को बताया गया कि बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और कानूनी प्रावधानों का पालन अत्यंत आवश्यक है।
बैठक में उपस्थित अधिकारियों को बताया गया कि यदि किसी बच्चे से जुड़ा मामला सामने आता है, तो उसे केवल एक कानूनी प्रक्रिया के रूप में नहीं बल्कि सामाजिक और मानवीय दृष्टिकोण से भी देखा जाना चाहिए। इससे बच्चों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
साइबर क्राइम और लैंगिक समानता पर जोर
प्रशिक्षण कार्यशाला में साइबर अपराधों से बच्चों को बचाने के उपायों पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों को बताया गया कि वर्तमान समय में इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के कारण बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। इसलिए पुलिस और संबंधित विभागों को इस दिशा में अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
इसके साथ ही लैंगिक समानता और नारी शक्ति जैसे विषयों पर भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने कहा कि समाज में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
विभिन्न विभागों के बीच समन्वय पर जोर
बैठक के दौरान विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों में केवल पुलिस ही नहीं बल्कि श्रम विभाग, जिला प्रोबेशन विभाग, चाइल्ड लाइन, किशोर न्याय बोर्ड और सामाजिक संस्थाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
इसी समन्वय को मजबूत बनाने के उद्देश्य से बैठक में कई विभागों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। उन्होंने अपने-अपने अनुभव साझा किए और भविष्य में मिलकर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया।
जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश
गोष्ठी के अंत में अधिकारियों ने निर्देश दिया कि बाल सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर जनजागरूकता अभियान चलाया जाए। इसके माध्यम से लोगों को बाल विवाह, बाल श्रम और बाल भिक्षावृत्ति जैसी समस्याओं के बारे में जागरूक किया जाएगा।
अधिकारियों का मानना है कि जब तक समाज के लोग इन मुद्दों के प्रति जागरूक नहीं होंगे, तब तक इन समस्याओं को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं होगा। इसलिए प्रशासन और सामाजिक संगठनों को मिलकर इस दिशा में प्रयास करने की आवश्यकता है।
कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी), श्रम विभाग, जिला प्रोबेशन विभाग, चाइल्ड लाइन, प्रधान किशोर न्याय बोर्ड, जन साहस संस्था, वन स्टॉप सेंटर सहित कई विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। इसके अलावा जनपद के सभी थानों के बाल कल्याण पुलिस अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।
बैठक के दौरान सभी अधिकारियों ने बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए समन्वित रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।
निष्कर्ष
ललितपुर में आयोजित यह मासिक गोष्ठी बाल सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लेने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इस प्रकार की बैठकों से विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने में मदद मिलती है।
प्रशासन का मानना है कि नियमित समीक्षा और प्रशिक्षण के माध्यम से पुलिस और अन्य विभाग बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों को अधिक प्रभावी ढंग से संभाल सकेंगे।
रिपोर्टर – मो. साहिल हबीब
Post a Comment