बहराइच। उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षामित्रों के लिए राहत और सम्मान से भरी बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विधानसभा में शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि की घोषणा किए जाने के बाद पूरे राज्य में उत्साह का माहौल है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि 1 अप्रैल 2026 से शिक्षामित्रों को ₹18,000 प्रति माह मानदेय दिया जाएगा। इस घोषणा को शिक्षामित्रों ने अपने लंबे संघर्ष, धैर्य और समर्पण की जीत बताया है।
लगभग नौ वर्षों से शिक्षामित्र मानदेय वृद्धि की मांग को लेकर लगातार प्रयासरत थे। कई बार संगठन स्तर पर ज्ञापन दिए गए, जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की गई और अपनी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। ऐसे में मुख्यमंत्री की यह घोषणा शिक्षामित्रों के लिए किसी सौगात से कम नहीं मानी जा रही है। शिक्षामित्रों का कहना है कि लंबे समय से आर्थिक तंगी और अस्थिरता का सामना कर रहे साथियों के जीवन में इस निर्णय से नई आशा का संचार हुआ है।
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के जिला अध्यक्ष शिव श्याम मिश्र ने इस घोषणा पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय शिक्षामित्रों के आत्मसम्मान और उनके योगदान का सम्मान है। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्र पिछले कई वर्षों से प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में जहां संसाधनों की कमी रहती है, वहां शिक्षामित्र ही शिक्षा व्यवस्था की मजबूत कड़ी बने हुए हैं। ऐसे में मानदेय वृद्धि का यह निर्णय उनके मनोबल को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
महिला प्रकोष्ठ की पदाधिकारी तृप्ति सिंह ने कहा कि इस निर्णय से महिला शिक्षामित्रों को विशेष राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में महिला शिक्षामित्र परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करती हैं। सीमित मानदेय के कारण उन्हें कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। ₹18,000 प्रति माह मानदेय मिलने से उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा और वे अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर सकेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि जिले में शीघ्र ही एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित कर उनका सम्मान किया जाएगा और शेष मांगों को लेकर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।
जिला प्रभारी रिजवान अली ने कहा कि यह निर्णय शिक्षामित्रों के समर्पण, परिश्रम और शिक्षा क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों ने विपरीत परिस्थितियों में भी विद्यालयों में शिक्षण कार्य को सुचारु रूप से संचालित रखा। कोरोना काल जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी उन्होंने बच्चों की पढ़ाई को जारी रखने में अपनी भूमिका निभाई। ऐसे में सरकार द्वारा मानदेय वृद्धि का निर्णय स्वागत योग्य है।
शिक्षामित्रों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हैं। साथ ही उन्होंने उन सभी सांसदों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों (एमएलसी), सामाजिक संगठनों और प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों का भी धन्यवाद ज्ञापित किया, जिन्होंने समय-समय पर उनकी मांगों को उठाया और समर्थन दिया। उनका मानना है कि यह सामूहिक प्रयासों का परिणाम है कि आज उनकी बहुप्रतीक्षित मांग पूरी हुई है।
हालांकि संगठन के पदाधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी कुछ अन्य मांगें भी लंबित हैं, जिनके समाधान के लिए संगठन अपनी पैरवी जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों की सेवा सुरक्षा, भविष्य निधि, पेंशन व्यवस्था और अन्य सुविधाओं को लेकर भी सरकार से संवाद जारी रहेगा। मानदेय वृद्धि एक सकारात्मक कदम है, लेकिन शिक्षामित्रों के समग्र कल्याण के लिए अभी और प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
प्रदेश के विभिन्न जिलों में शिक्षामित्रों द्वारा खुशी व्यक्त करते हुए मिठाइयां बांटी गईं और एक-दूसरे को बधाई दी गई। कई स्थानों पर बैठकें आयोजित कर मुख्यमंत्री के प्रति आभार प्रकट किया गया। शिक्षामित्रों ने कहा कि यह निर्णय उनके जीवन में नई ऊर्जा लेकर आया है। लंबे समय से वे स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे थे, लेकिन अब उन्हें लगता है कि उनकी आवाज सुनी गई है।
शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि शिक्षामित्रों का मनोबल बढ़ने से प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। जब शिक्षक आर्थिक और मानसिक रूप से संतुष्ट होते हैं, तो वे अधिक समर्पण और उत्साह के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर सुधारने में शिक्षामित्रों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है और यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करेगा।
कुल मिलाकर, 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाली ₹18,000 मासिक मानदेय की घोषणा ने शिक्षामित्रों के जीवन में नई उम्मीद जगा दी है। इसे वे केवल आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि अपने सम्मान और योगदान की स्वीकृति के रूप में देख रहे हैं। संगठन ने विश्वास जताया है कि भविष्य में भी सरकार उनके हितों को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक निर्णय लेती रहेगी।
यह निर्णय प्रदेश के शिक्षामित्रों के लिए एक नई शुरुआत का संकेत है। वर्षों के संघर्ष, प्रतीक्षा और आशा के बाद मिली यह सफलता उनके लिए गर्व और संतोष का विषय बनी हुई है।
Post a Comment