लम्भुआ (सुलतानपुर)। इंटरनेट और डिजिटल तकनीक के इस तेजी से बदलते दौर में विद्यार्थियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सोशल मीडिया का संतुलित उपयोग है। मोबाइल और इंटरनेट ने जहां ज्ञान, सूचना और संवाद के नए द्वार खोले हैं, वहीं इसके अति प्रयोग ने युवाओं के सामने कई नई समस्याएं भी खड़ी कर दी हैं। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे सोशल मीडिया के गुलाम बनने के बजाय उसका विवेकपूर्ण और रचनात्मक उपयोग करें।
ये विचार राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि ने व्यक्त किए। वह संजय गांधी पीजी कॉलेज द्वारा प्राथमिक विद्यालय तेरयें में आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) शिविर के दूसरे दिन आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आज का युवा वर्ग सोशल मीडिया से पूरी तरह जुड़ा हुआ है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर घंटों समय व्यतीत करना सामान्य बात हो गई है। यदि इन माध्यमों का उपयोग ज्ञानवर्धन, कौशल विकास और सकारात्मक संवाद के लिए किया जाए तो यह अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है। छात्र ऑनलाइन पाठ्यक्रम, शैक्षणिक सामग्री और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
किन्तु उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग मानसिक तनाव, ध्यान में कमी, समय की बर्बादी और साइबर बुलिंग जैसी समस्याओं को जन्म देता है। कई बार विद्यार्थी आभासी दुनिया में इतने अधिक उलझ जाते हैं कि उनका अध्ययन और सामाजिक जीवन प्रभावित होने लगता है। इसलिए आवश्यक है कि सोशल मीडिया पर हमारा नियंत्रण हो, न कि वह हमें नियंत्रित करे।
प्रो. रवि ने राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एनएसएस विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का सशक्त मंच है। यहां सेवा, समर्पण, अनुशासन और नेतृत्व जैसे गुण विकसित होते हैं। सामुदायिक सेवा के माध्यम से छात्र समाज की वास्तविक समस्याओं को समझते हैं और उनके समाधान के लिए संवेदनशील बनते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे शिविर युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण की भावना को सुदृढ़ करते हैं।
कार्यक्रम में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ धर्मेंद्र सिंह ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने स्वयंसेवकों को मतदाता बनने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने मतदाता परिचय पत्र बनवाने की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि प्रत्येक युवा को अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करना चाहिए।
संगोष्ठी के दौरान विद्यार्थियों ने भी प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाएं व्यक्त कीं। वक्ताओं ने उन्हें सकारात्मक सोच, समय प्रबंधन और लक्ष्य निर्धारण के महत्व से अवगत कराया। बताया गया कि यदि विद्यार्थी अपने समय का उचित विभाजन करें और पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में भी भाग लें, तो वे एक जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं।
कार्यक्रम का स्वागत कार्यक्रमाधिकारी डॉ शीला सिंह ने किया। उन्होंने शिविर के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एनएसएस का मूल मंत्र ‘नॉट मी, बट यू’ है, जो सेवा भावना का प्रतीक है। आभार प्राचार्य डॉ मंजू मगन ने व्यक्त किया तथा संचालन डॉ धर्म विजय सिंह ने किया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक, शिक्षक एवं महाविद्यालय के कर्मचारी उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम का वातावरण उत्साहपूर्ण और प्रेरणादायक रहा। विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे सोशल मीडिया का विवेकपूर्ण उपयोग करेंगे और समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
इससे पूर्व प्रो. ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि ने विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त बाह्य परीक्षक के रूप में एम.ए. हिंदी प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों की मौखिक परीक्षा संपन्न कराई। उन्होंने विद्यार्थियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए उन्हें निरंतर अध्ययन और अनुशासन बनाए रखने की प्रेरणा दी।
इस प्रकार एनएसएस शिविर के दूसरे दिन आयोजित संगोष्ठी ने विद्यार्थियों को डिजिटल युग में संतुलन बनाए रखने और सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने की दिशा में सार्थक मार्गदर्शन प्रदान किया।
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