मड़ावरा (ललितपुर)। थाना मड़ावरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रखवारा में एक राय होकर की गई मारपीट, लूट और धमकी की घटना ने क्षेत्र में आक्रोश और दहशत का माहौल बना दिया है। मामला केवल दबंगई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पीडि़तों ने पुलिसिया रवैये पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। पीडि़त शिवम पुत्र शिवचरन एवं अंशुल पुत्र सुजान, निवासी थाना मड़ावरा के अनुसार 02 जनवरी 2026 को वे अपनी दादी के निधन के बाद दिन का भोजन तैयार कराने हेतु ग्राम रखवारा में हलवाई महेश पटेल के घर गए थे। कार्य समाप्त कर लौटते समय ग्राम रखवारा में स्कूल के सामने हैंडपंप के पास सुदीप यादव, अरबिन्द यादव, कल्लू यादव पुत्र ऊदल, प्रशांत यादव पुत्र सुखपाल यादव, जितेंद्र यादव, गजेंद्र यादव, रविन्द्र यादव पुत्र अमर सिंह यादव सहित चार अन्य अज्ञात लोगों ने उनकी मोटरसाइकिल रोककर लाठी डंडों और लात घूंसों से बेरहमी से मारपीट की। आरोप है कि मारपीट के दौरान शिवम के गले से लगभग दो तोला सोने की चेन छीन ली गई और अंशुल की जेब में रखे दस हजार रुपये भी लूट लिए गए। हमलावरों ने मोटरसाइकिल को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। पीडि़तों का कहना है कि आरोपियों के पास अवैध तमंचा भी था और शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी गई। पीडि़तों ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद जब वे मड़ावरा थाने पहुंचे और लिखित शिकायत दी, तो थाना प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार ने उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें धमकाते हुए थाने से बाहर निकलने को कहा और गालियां भी दीं। पीडि़तों के अनुसार यह पहली घटना नहीं है। एक दिन पहले दिनांक 01 जनवरी 2026 को लाहरधाम में नए वर्ष के उपलक्ष्य में हनुमानजी के मंदिर पर आयोजित मेले में भी ग्राम रखवारा के कुछ युवकों द्वारा गलत हरकतें की गई थीं। उस दौरान जब प्रार्थियों ने विरोध किया, तो उन्हीं युवकों ने प्रार्थी के भाई के साथ मारपीट की थी। उस मामले में भी मड़ावरा पुलिस को लिखित दरख्वास्त दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पीडि़तों का आरोप है कि न तो 01 जनवरी की घटना पर पुलिस ने कार्रवाई की और न ही 02 जनवरी को हुई गंभीर मारपीट और लूट की घटना पर, बल्कि उल्टे पीडि़तों को ही गालियां देकर भगा दिया गया। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो पीडि़तों का पुलिस और प्रशासन से विश्वास उठ सकता है।
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