सुलतानपुर में सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत विशेष कार्यक्रम
NTI TV सुलतानपुर। शासन के मंशानुसार एवं परिवहन आयुक्त के निर्देश पर 1 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक सड़क सुरक्षा माह पूरे प्रदेश में मनाया जा रहा है। इसी क्रम में शनिवार को सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) कार्यालय, सुलतानपुर में एक निःशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम एआरटीओ (प्रशासन) अलका शुक्ला के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य सड़क पर चलने वाले चालकों की दृष्टि क्षमता की जांच कर उन्हें सुरक्षित वाहन संचालन के लिए जागरूक करना था। सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में दृष्टि दोष भी एक अहम कारण माना जाता है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह शिविर आयोजित किया गया।
नेत्र परीक्षण शिविर में 50 से अधिक लोगों की जांच
शिविर में प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ. हरेंद्र नाथ वरुण द्वारा रोडवेज के चालकों-परिचालकों तथा ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित कार्यों से कार्यालय आए लगभग 50 से अधिक आवेदकों का नेत्र परीक्षण किया गया।
नेत्र परीक्षण के दौरान चालकों की आंखों की रोशनी, रंग पहचान (कलर विजन), दूर और पास की दृष्टि की जांच की गई। जिन चालकों में दृष्टि संबंधी कमी पाई गई, उन्हें उचित परामर्श देते हुए आगे इलाज कराने की सलाह दी गई।
सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता के लिए नुक्कड़ नाटक
नेत्र परीक्षण शिविर के साथ-साथ सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान भी चलाया गया। एआरटीओ कार्यालय परिसर एवं अमहट चौराहा पर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से आमजन को सड़क सुरक्षा नियमों की जानकारी दी गई।
नुक्कड़ नाटक में कलाकारों ने हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने, तेज गति से वाहन न चलाने, नशे की हालत में वाहन न चलाने और ट्रैफिक नियमों का पालन करने जैसे महत्वपूर्ण संदेशों को रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया।
विभिन्न चौराहों पर दी गई सड़क सुरक्षा नियमों की जानकारी
सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत परिवहन विभाग की टीम द्वारा शहर के विभिन्न प्रमुख चौराहों पर आमजन को रोक-रोक कर सड़क सुरक्षा नियमों की जानकारी दी गई। इस दौरान लोगों को पंपलेट वितरित किए गए और यातायात संकेतों की जानकारी दी गई।
इसके साथ ही नागरिकों को सड़क सुरक्षा की शपथ भी दिलाई गई, जिसमें सभी ने यह संकल्प लिया कि वे स्वयं भी यातायात नियमों का पालन करेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।
एआरटीओ अलका शुक्ला का बयान
इस अवसर पर एआरटीओ (प्रशासन) अलका शुक्ला ने कहा—
“वाहन हमेशा मानक के अनुरूप ही चलाएं। वाहन चलाते समय सभी सुरक्षा मानकों का पालन करना न केवल चालक बल्कि यात्रियों और उनके परिवार की सुरक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी से होने वाली दुर्घटनाएं परिवारों को गहरा आघात पहुंचाती हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि सड़क सुरक्षा माह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक जन आंदोलन है, जिसमें हर नागरिक की सहभागिता जरूरी है।
सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण और समाधान
भारत में हर वर्ष हजारों लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा देते हैं। इसके प्रमुख कारणों में—
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तेज रफ्तार
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नशे की हालत में वाहन चलाना
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हेलमेट और सीट बेल्ट का प्रयोग न करना
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खराब दृष्टि
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यातायात नियमों की अनदेखी
नेत्र परीक्षण शिविर जैसे कार्यक्रम इन समस्याओं को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
चालकों के लिए नेत्र परीक्षण क्यों है जरूरी?
विशेषज्ञों के अनुसार, वाहन चलाने वाले चालकों के लिए नियमित नेत्र परीक्षण बेहद आवश्यक है क्योंकि—
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सड़क संकेतों को पहचानने में मदद मिलती है
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रात में ड्राइविंग के दौरान दुर्घटनाओं का खतरा कम होता है
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रंग पहचान से ट्रैफिक सिग्नल सही तरीके से समझ आते हैं
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समय रहते आंखों की बीमारी का पता चल जाता है
इसी उद्देश्य से परिवहन विभाग द्वारा ऐसे शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
सड़क सुरक्षा माह: एक जनहित अभियान
सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत पूरे जिले में—
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जागरूकता रैलियां
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स्कूल-कॉलेजों में यातायात जागरूकता कार्यक्रम
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स्वास्थ्य एवं नेत्र परीक्षण शिविर
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नुक्कड़ नाटक
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शपथ कार्यक्रम
जैसे कई आयोजन किए जा रहे हैं, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके।
आमजन से अपील
परिवहन विभाग ने आमजन से अपील की है कि—
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दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट अवश्य पहनें
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चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाएं
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मोबाइल फोन का प्रयोग वाहन चलाते समय न करें
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निर्धारित गति सीमा का पालन करें
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वाहन के सभी दस्तावेज पूरे रखें
निष्कर्ष
सुलतानपुर में सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय में आयोजित नेत्र परीक्षण शिविर एवं सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम एक सराहनीय पहल है। ऐसे कार्यक्रम न केवल चालकों के स्वास्थ्य की जांच करते हैं, बल्कि समाज को सुरक्षित यातायात के प्रति जागरूक भी करते हैं।
यदि हम सभी मिलकर सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करें, तो निश्चित रूप से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है और अनमोल जिंदगियों को बचाया जा सकता है।

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