यह मामला केवल जमीन पर अवैध कब्जे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जान से मारने की धमकी, प्रशासनिक उदासीनता और पहले की गई शिकायतों की संदिग्ध जांच जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं, जिसने पूरे समाधान दिवस में लोगों का ध्यान खींचा।
पैतृक भूमि पर जबरन कब्जे का आरोप
पीड़िता राधिका देवी ने अपने शिकायती पत्र में बताया कि उनकी गाटा संख्या 438 और 475 की भूमि उनके पूर्वजों की पुश्तैनी संपत्ति है, जो सौरमऊ क्षेत्र में स्थित है और वर्तमान समय में काफी कीमती मानी जाती है। आरोप है कि इसी भूमि पर योगेश शुक्ला और अखिलेश मिश्रा नामक व्यक्तियों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है।
राधिका देवी के अनुसार, जब उन्होंने इस अवैध कब्जे का विरोध किया तो उन्हें धमकियां दी जाने लगीं, जिससे उनका और उनके परिवार का जीवन संकट में पड़ गया है।
मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत, लेकिन बिना सूचना जांच पूरी
पीड़िता ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर पहले मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर भी शिकायत दर्ज कराई थी। उन्हें उम्मीद थी कि शासन स्तर से इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच होगी, लेकिन आरोप है कि—
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शिकायत की जांच आवेदक को बिना बताए ही पूरी कर दी गई
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न तो मौके पर सही तरीके से जांच हुई
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न ही पीड़िता का पक्ष गंभीरता से सुना गया
राधिका देवी का कहना है कि इस तरह की कार्यप्रणाली से दबंगों का मनोबल बढ़ता है और आम नागरिकों का प्रशासन से विश्वास उठता जा रहा है।
शिकायत के बाद बढ़ा खतरा, जान से मारने की धमकी का आरोप
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि जब से उन्होंने अवैध कब्जे की शिकायत की है, तब से उन्हें और उनके परिवार को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि दबंग खुलेआम धमकी देते हैं और उन्हें डराने की कोशिश करते हैं ताकि वे अपनी जमीन से हाथ खींच लें।
राधिका देवी ने समाधान दिवस में मौजूद अधिकारियों से भावुक अपील करते हुए कहा कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।
देवनारायण तिवारी ने भी लगाए गंभीर आरोप
इस प्रकरण में देवनारायण तिवारी नामक व्यक्ति ने भी प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि संबंधित गाटा संख्या की भूमि उनके सगे चाचा द्वारा बेची गई थी, लेकिन वर्तमान में जिस तरह से कब्जा किया जा रहा है, वह पूरी तरह अवैध है।
देवनारायण तिवारी का आरोप है कि—
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अखिलेश मिश्रा और योगेश शुक्ला भूमाफिया किस्म के लोग हैं
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इनसे उन्हें भी जान का खतरा बना हुआ है
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दबंगों ने पुलिस कर्मियों की मौजूदगी में भी धमकी दी
उन्होंने दावा किया कि धमकी से जुड़ा वीडियो साक्ष्य उनके पास मौजूद है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन को सौंपा जा सकता है।
पुलिस की मौजूदगी में धमकी का आरोप, सवालों के घेरे में व्यवस्था
पीड़ित पक्ष का कहना है कि जब कानून के रखवाले मौजूद हों और उसी समय धमकी दी जाए, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उनका आरोप है कि दबंगों को स्थानीय स्तर पर संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण वे बेखौफ होकर इस तरह की हरकतें कर रहे हैं।
समाधान दिवस में मौजूद अन्य फरियादियों और आम नागरिकों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की।
सम्पूर्ण समाधान दिवस का उद्देश्य और जमीनी हकीकत
सम्पूर्ण समाधान दिवस का मुख्य उद्देश्य यही होता है कि—
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आम जनता की समस्याओं को सीधे सुना जाए
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मौके पर ही त्वरित समाधान निकाला जाए
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भूमि विवाद जैसे मामलों में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो
लेकिन इस मामले में पीड़ितों का कहना है कि उन्हें पहले भी कई मंचों से निराशा हाथ लगी है। अब समाधान दिवस से उन्हें अंतिम उम्मीद है।
पीड़ितों की प्रमुख मांगें
राधिका देवी और देवनारायण तिवारी ने प्रशासन के सामने निम्न मांगें रखीं—
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गाटा संख्या 438 और 475 की निष्पक्ष राजस्व जांच
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अवैध कब्जा हटाने की तत्काल कार्रवाई
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जान से मारने की धमकी देने वालों पर आपराधिक मुकदमा
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पीड़ित परिवार को सुरक्षा मुहैया कराई जाए
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IGRS शिकायत की दोबारा स्वतंत्र जांच
प्रशासन की प्रतिक्रिया और अगली कार्रवाई
सम्पूर्ण समाधान दिवस में मौजूद अधिकारियों ने पीड़ितों की शिकायत को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि—
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मामले की रिपोर्ट मंगाई जाएगी
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राजस्व और पुलिस विभाग से संयुक्त जांच कराई जाएगी
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तथ्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी
हालांकि समाचार लिखे जाने तक जिला प्रशासन की ठोस कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।
जिले में बढ़ते भूमि विवाद, प्रशासन के लिए चुनौती
सुल्तानपुर जिले में भूमि विवाद और अवैध कब्जे के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे मामलों में यदि समय पर कार्रवाई न हो तो यह कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं।
सम्पूर्ण समाधान दिवस में उठाया गया यह मामला न केवल एक परिवार की पीड़ा को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त और पारदर्शी कार्रवाई कितनी जरूरी है।
निष्कर्ष
सम्पूर्ण समाधान दिवस में महिला की यह फरियाद प्रशासन के लिए एक परीक्षा है। यदि निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होती है, तो यह आम जनता के विश्वास को मजबूत करेगा। वहीं, यदि मामला फाइलों में दबा रह गया, तो यह न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर भूमि विवाद और धमकी के आरोपों पर क्या ठोस कदम उठाता है।

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