रायबरेली, 23 फरवरी 2026। राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत शिवगढ़ ब्लॉक में 10 फरवरी से चल रहे सर्वजन दवा सेवन अभियान (आईडीए) को इस बार सामुदायिक सहयोग से नई गति मिली है। खास बात यह है कि स्वास्थ्यकर्मियों के साथ-साथ फाइलेरिया से प्रभावित मरीज भी अब जागरूकता अभियान की कमान संभाल रहे हैं।
अभियान के शुरुआती दिनों में लोगों के बीच दवा को लेकर झिझक और डर का माहौल था। कई परिवारों ने दवा सेवन से इंकार कर दिया था। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) और पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म (पीएसपी) के सदस्यों की लगातार कोशिशों से स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है।
मरीज की आपबीती से बदली सोच
रीवा गांव निवासी 27 वर्षीय आकाश, जो स्वयं फाइलेरिया से प्रभावित हैं, अब इस अभियान का चेहरा बन चुके हैं। नाइट ब्लड सर्वे के दौरान जांच में उनके शरीर में फाइलेरिया के परजीवी पाए गए थे, जबकि उन्हें कोई स्पष्ट लक्षण नहीं थे।
आकाश बताते हैं कि उन्होंने पहले फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन नहीं किया था, जिससे संक्रमण शरीर में प्रवेश कर गया। विशेषज्ञों के अनुसार इस बीमारी के लक्षण पांच से 15 वर्ष बाद तक भी सामने आ सकते हैं, तब तक स्थिति गंभीर हो सकती है।
अपनी इसी अनुभव को साझा करते हुए आकाश अब तक लगभग 100 ऐसे लोगों को दवा सेवन के लिए तैयार कर चुके हैं, जिन्होंने पहले मना कर दिया था। उनका कहना है कि अज्ञानता या भय के कारण दवा न लेना भविष्य में गंभीर परिणाम दे सकता है।
इंकार से सहमति तक: आंकड़ों में बदलाव
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार शिवगढ़ ब्लॉक में कुल 4,319 लोगों ने प्रारंभ में दवा सेवन से इंकार किया था। इनमें से 2,631 लोग, यानी लगभग 66 प्रतिशत, अब समझाने के बाद दवा लेने को तैयार हो गए हैं।
यह बदलाव सामुदायिक संवाद और घर-घर जाकर समझाने के प्रयासों का परिणाम है। स्वास्थ्य टीमें लगातार लोगों से मिलकर फाइलेरिया की रोकथाम, उसके प्रभाव और दवा की सुरक्षा के बारे में जानकारी दे रही हैं।
71 हजार से अधिक लोगों ने किया दवा सेवन
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चंद्रा ने बताया कि अब तक 71,526 पात्र लाभार्थियों ने फाइलेरिया रोधी दवाएं—आइवरमेक्टिन, डाईइथाइल कार्बामाजीन और एल्बेंडाजोल—का सेवन कर लिया है। शिवगढ़ ब्लॉक में लक्षित जनसंख्या 1.23 लाख निर्धारित की गई है।
अभियान के सात कार्य दिवसों में लगभग 55 प्रतिशत पात्र आबादी तक दवा पहुंचाई जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि शेष आबादी तक भी शीघ्र पहुंच बनाकर अधिकतम कवरेज सुनिश्चित किया जाए।
90 प्रतिशत कवरेज है लक्ष्य
जिला मलेरिया अधिकारी रमेश यादव ने बताया कि संक्रमण की श्रृंखला तोड़ने के लिए कम से कम 90 प्रतिशत पात्र आबादी को दवा खिलाना अनिवार्य है। यदि व्यापक स्तर पर दवा सेवन सुनिश्चित किया गया तो आने वाले वर्षों में फाइलेरिया के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि इसके लिए निरंतर जनजागरूकता, स्थानीय नेतृत्व और मरीजों की सहभागिता बेहद जरूरी है। सामुदायिक भागीदारी से ही इस अभियान को सफलता मिल सकती है।
सामुदायिक सहभागिता से मजबूत हो रहा अभियान
मुख्य चिकित्सा अधिकारी का मानना है कि मरीजों की सक्रिय भागीदारी और समुदाय के सहयोग से शिवगढ़ ब्लॉक ही नहीं, बल्कि पूरे जनपद को फाइलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति संभव है।
अभियान का संदेश स्पष्ट है—समय पर दवा सेवन ही फाइलेरिया से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी भ्रम या अफवाह पर ध्यान न दें और निर्धारित दवा का सेवन अवश्य करें, ताकि भविष्य में इस गंभीर बीमारी से बचाव सुनिश्चित किया जा सके।
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