⚡ ब्रेकिंग News

साढ़े आठ लाख से बना ब्लॉक का सामुदायिक शौचालय बना शोपीस, बदहाली पर उठे गंभीर सवाल

दूबेपुर (सुल्तानपुर)। सरकारी योजनाओं के तहत निर्मित सार्वजनिक सुविधाओं की स्थिति अक्सर कागजों में बेहतर दिखाई देती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आती है। ऐसा ही एक मामला दूबेपुर ब्लॉक परिसर में सामने आया है, जहां साढ़े आठ लाख रुपये से अधिक की लागत से निर्मित सामुदायिक शौचालय आज निष्प्रयोज्य बना हुआ है। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद यह शौचालय आमजन के उपयोग में नहीं आ पा रहा है, जिससे सरकारी धन के सही उपयोग पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार दूबेपुर ब्लॉक परिसर में स्थित इस सामुदायिक शौचालय का निर्माण पंचम राज्य वित्त आयोग की धनराशि से 8 लाख 36 हजार रुपये की लागत से वित्तीय वर्ष 2022-23 में कराया गया था। निर्माण के समय इसका उद्देश्य ब्लॉक परिसर में आने वाले कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों को स्वच्छ व सुरक्षित शौचालय सुविधा उपलब्ध कराना था, लेकिन वर्तमान स्थिति इसके ठीक विपरीत है।
शौचालय की मौजूदा हालत काफी खराब बताई जा रही है। अंदर लगे बेसिन टूट चुके हैं, वहीं यूरिन पाइप उखड़ने के कारण पानी की निकासी बाधित हो रही है। फर्श और दीवारों पर गंदगी जमी हुई है, जिससे पूरे परिसर में दुर्गंध फैलती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यहां लंबे समय से साफ-सफाई नहीं की गई, जिससे यह सामुदायिक शौचालय धीरे-धीरे उपयोग से बाहर हो गया है।
ब्लॉक परिसर में आने वाले लोगों का कहना है कि जब कोई सार्वजनिक सुविधा इस तरह बदहाल होती है तो उसका सीधा असर आमजन की सुविधा और स्वच्छता पर पड़ता है। कर्मचारियों और आगंतुकों को मजबूरी में अन्य स्थानों पर शौचालय तलाशना पड़ता है, जो असुविधाजनक होने के साथ-साथ स्वच्छता अभियान के उद्देश्य को भी कमजोर करता है।
इस पूरे मामले में जब खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) दिव्या सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ब्लॉक परिसर में यह सामुदायिक शौचालय विशेष अवसरों पर ही खोला जाता है, जबकि नियमित उपयोग के लिए परिसर में एक अन्य शौचालय उपलब्ध है। हालांकि सवाल यह उठता है कि यदि दूसरा शौचालय मौजूद है तो फिर लाखों रुपये की लागत से अलग से सामुदायिक शौचालय का निर्माण क्यों कराया गया और यदि कराया गया तो उसका नियमित उपयोग और रखरखाव क्यों नहीं किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी धन से बनी किसी भी संपत्ति का समय पर रखरखाव न होना, योजना की असफलता को दर्शाता है। यदि नियमित रूप से सफाई कराई जाती और टूट-फूट की मरम्मत समय रहते होती, तो आज यह शौचालय बेकार न पड़ा होता। इससे यह भी सवाल उठता है कि निर्माण कार्य में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता कैसी थी और निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी रही।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत सरकार लगातार स्वच्छता को लेकर जागरूकता अभियान चला रही है, लेकिन जब सरकारी परिसरों में ही स्वच्छता सुविधाएं बदहाल हों तो आम जनता तक सकारात्मक संदेश नहीं पहुंच पाता। दूबेपुर ब्लॉक का यह सामुदायिक शौचालय भी इसी विडंबना का उदाहरण बन गया है।
अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग इस मामले की जांच कराए, शौचालय की मरम्मत और साफ-सफाई सुनिश्चित करे और इसे आम उपयोग के लिए खोला जाए। साथ ही, भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए निर्माण के बाद नियमित मेंटेनेंस सिस्टम को मजबूत किया जाए, ताकि सरकारी धन का सदुपयोग हो सके और आम जनता को वास्तविक लाभ मिल सके।

Post a Comment

Previous Post Next Post
BREAKING NEWS : Loading...

ताज़ा खबरें

राजनीति समाचार
राजनीति समाचार लोड हो रहे हैं...