झांसी। ब्यूरो सियासत के साए में करोड़ों के सट्टे का साम्राज्य खड़ा करने करने वाले व्हाइट व्हाइट कॉलर सटोरियों की संपत्ति का खुलासा होने पर सट्टा माफियों के कालेधन की परते धीरे-धीरे खुलाना शुरू हो गई है। बताते चले कि अभी हालही में झांसी में 100 करोड़ के सट्टा कारोबार का खुलासा हुआ था। जिसने पूरे प्रशासनिक अमले में हलचल मचा दी है। पुलिस की शुरुआती जांच में सट्टा माफियाओं के पास करीब 500 करोड़ की चल-अचल संपत्ति का पता चला है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस काले साम्राज्य की परतें खुलती जा रही हैं, और पूरे नेटवर्क में कई बड़े नाम सामने आए है। जिनमें शुभम, विजय और नितिन प्रमुख हैं। इन तीनों के पास ही 200 करोड़ से अधिक की संपत्ति का पता चला है। यह संपत्ति सिर्फ जमीन-जायदाद तक सीमित नहीं है, बल्कि आलीशान मकान, प्लॉट, कमर्शियल बिल्डिंग और महंगी गाड़ियो तक फैली हुई है। सूत्रो से मिली जानकारी के मुताबिक आरोपित करोड़पति सटोरियों के कालेधन की जांच के लिए आईटी टीम की एंट्री होने से सट्टा माफियों में हड़कंप मच गया है। वही पुलिस ने रजिस्ट्री कार्यालय से बेनामी संपत्ति की जांच करने के लिए मदद मांगी है।
आईटी टीम की एंट्री -
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब आयकर विभाग (आईटी) भी सक्रिय हो गया है। पुलिस ने आधिकारिक तौर पर आईटी टीम से मदद मांगी है ताकि सट्टा कारोबार से अर्जित काले धन का पूरा ब्योरा खंगाला जा सके। आईटी टीम अब बैंक खातों, लेन-देन और संपत्तियों की गहन जांच में जुटने जा रही है। सूत्र बताते हैं कि आने वाले दिनों में कई बड़े ठिकानों पर छापेमारी हो सकती है। खासतौर पर उन लोगों पर शिकंजा कसने की तैयारी है, जिन्होंने सट्टे के जरिए अवैध कमाई को वैध दिखाने के लिए जटिल नेटवर्क तैयार किया। रजिस्ट्री कार्यालय से मांगी गई जानकारी, बेनामी संपत्तियों की जांच तेज पुलिस ने इस मामले में रजिस्ट्री कार्यालय से भी विस्तृत जानकारी मांगी है। आशंका है कि सट्टा माफियाओं ने अपनी संपत्तियों को छुपाने के लिए बड़ी संख्या में बेनामी रजिस्ट्री कराई है। अब इन रजिस्ट्री दस्तावेजों की जांच कर असली मालिकों का पता लगाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि कई संपत्तियां ऐसे लोगों के नाम पर दर्ज हैं, जिनकी आय का कोई स्पष्ट स्रोत नहीं है। इससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि काले धन को सफेद बनाने के लिए बेनामी सौदों का सहारा लिया गया।
राजनीतिक कनेक्शन की जांच -
इस पूरे मामले में एक और बढ़ा पहलू सामने आया है, जिसमें भाजपा नेता आशीष का नाम भी चर्चा में है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेता आशीष उपाध्याय के पास भी कई करोड़ की चल-अचल संपत्ति होने की बात सामने आई है। हालांकि, इस संबंध में अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच एजेंसियां इस एंगल पर भी गंभीरता से काम कर रही हैं। यदि राजनीतिक संरक्षण या मिलीभगत के सबूत मिलते हैं, तो यह मामला और भी बड़ा रूप ले सकता है। फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां हर पहलू को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ रही हैं।
सट्टा नेटवर्क का फैलाव -
जांच में यह भी सामने आया है कि यह सट्टा नेटवर्क सिर्फ झांसी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अन्य जिलों और राज्यों तक जुड़े हो सकते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन सट्टा ऐप्स के जरिए इस कारोबार को विस्तार दिया गया, जिससे करोड़ो का लेन-देन बेहद आसानी से किया जा रहा था। तकनीकी टीम अब इन ऑनलाइन नेटवर्क की भी जांच कर रही है, ताकि पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जा सके। आने वाले दिनों में बड़े खुलासों के संकेत मिल सकते हैं । वही पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में कई खुलासे हो सकते हैं। कई संदिग्धों को चिन्हित किया गया है और उनसे पूछताछ की तैयारी चल रही है। झांसी में इस कार्रवाई को अब तक की सबसे बड़ी सट्टा विरोधी कार्रवाई माना जा रहा है। अगर जांच इसी रफ्तार से आगे बड़ी तो न सिर्फ सट्टा माफियाओं का पूरा नेटवर्क उजागर होगा, बल्कि काले धन के बड़े खेल का भी खुलासा हो सकता है।
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