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वैश्विक तनाव के बीच भारत के सामने तेल-गैस आपूर्ति की चुनौती, सरकार ने शुरू की नई रणनीति

 


NTI TV Digital Desk
दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता देखी जा रही है। इसका असर तेल और गैस की आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। ऐसे समय में भारत जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देश के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि भविष्य में तेल और गैस की उपलब्धता कैसे सुनिश्चित की जाए।

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करते हैं। देश में कच्चे तेल की खपत लगातार बढ़ रही है, क्योंकि उद्योग, परिवहन और बिजली उत्पादन में ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 से 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है।

वैश्विक तनाव का ऊर्जा बाजार पर असर

दुनिया में चल रहे संघर्ष और आर्थिक प्रतिबंधों के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है Russia–Ukraine War, जिसने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। इस युद्ध के बाद कई देशों ने ऊर्जा आपूर्ति के नए स्रोत खोजने शुरू कर दिए हैं।

यूरोप के कई देशों ने रूसी तेल और गैस पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश की है, जिससे वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा और बढ़ गई है। इसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

भारत की ऊर्जा रणनीति

भारत सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई कदम उठाए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है अलग-अलग देशों से तेल आयात करना, ताकि किसी एक देश पर निर्भरता कम हो सके।

भारत वर्तमान में मध्य पूर्व, अफ्रीका और रूस जैसे कई क्षेत्रों से कच्चा तेल आयात करता है। इसके अलावा देश में घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को भी तेजी से बढ़ावा दिया जाए, ताकि तेल और गैस पर निर्भरता धीरे-धीरे कम की जा सके।

गैस क्षेत्र में बढ़ रही मांग

तेल के साथ-साथ प्राकृतिक गैस की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। उद्योगों और बिजली उत्पादन में गैस का उपयोग बढ़ने के कारण इसकी खपत में लगातार वृद्धि हो रही है।

भारत सरकार का लक्ष्य है कि देश के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को आने वाले वर्षों में बढ़ाया जाए। इसके लिए पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है और कई नए गैस टर्मिनल भी बनाए जा रहे हैं।

इसके अलावा शहरों में सीएनजी और पीएनजी गैस की सुविधा बढ़ाने के लिए भी योजनाएं चलाई जा रही हैं।

नवीकरणीय ऊर्जा पर बढ़ता जोर

ऊर्जा संकट से निपटने के लिए भारत केवल तेल और गैस पर निर्भर नहीं रहना चाहता। सरकार सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन जैसे विकल्पों पर तेजी से काम कर रही है।

भारत ने दुनिया में सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है। कई राज्यों में बड़े सोलर पार्क स्थापित किए गए हैं, जिससे बिजली उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार इसी गति से जारी रहा, तो भविष्य में भारत ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है।

पेट्रोल-डीजल कीमतों पर असर

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ती हैं, तो देश में भी ईंधन महंगा होने की संभावना बढ़ जाती है।

हालांकि सरकार कई बार टैक्स में बदलाव और अन्य उपायों के जरिए उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश करती है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक तनाव कम होता है, तो तेल की कीमतों में स्थिरता आ सकती है। लेकिन यदि संघर्ष बढ़ता है, तो ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी रह सकती है।

ऊर्जा सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता

भारत जैसे तेजी से विकसित हो रहे देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। उद्योग, परिवहन, कृषि और घरेलू उपयोग के लिए लगातार ऊर्जा की जरूरत बढ़ रही है।

इसी कारण सरकार ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों को विकसित करने और आयात के नए विकल्प तलाशने पर जोर दे रही है। इसके साथ ही ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहन देने की नीति भी अपनाई जा रही है।

भविष्य की चुनौतियां

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत के सामने कई चुनौतियां होंगी। इनमें बढ़ती मांग, आयात पर निर्भरता और वैश्विक बाजार की अस्थिरता प्रमुख हैं।

लेकिन यदि देश ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को तेजी से विकसित करता है और घरेलू उत्पादन बढ़ाता है, तो इन चुनौतियों से निपटना संभव हो सकता है।

निष्कर्ष

वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के बीच तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि भारत सरकार ऊर्जा सुरक्षा को लेकर लगातार सक्रिय कदम उठा रही है।

ऊर्जा के विविध स्रोतों का उपयोग, नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग भारत को भविष्य में संभावित ऊर्जा संकट से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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